>आलीशान मकानों से डर लगता है
सफेदपोशों से अब डर लगता है
गाँधी,सुभाष,भगत सिंह,बिस्मिल
आ जाएँ कि फिर डर लगता है
आज नेतृत्व की नियत है निठुर
कारवां के भटकने का डर लगता है
जिस मिट्टी के सोंधेपन में सरूर
बदले ना कहीं खुशबू कि डर लगता है
उफन रहीं तो कहीं सूख रहीं नदियाँ
अब कश्तियों को भी डर लगता है
प्यार में भी मिलावट ना रहे तरावट
ऐसी बनावट से अब डर लगता है.
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