डर लगता है
>आलीशान मकानों से डर लगता है सफेदपोशों से अब डर लगता है गाँधी,सुभाष,भगत सिंह,बिस्मिल आ जाएँ कि ...
Dhirendra Singh द्वारा 10 मई, 2011 10:25:00 AM IST पर पोस्टेड
नेह तुम्हारा
अब भी मेरे नयन पुलकित आस की राहें हैं हर्षित कौन कहता चुक गया स्नेह शब्द मेरे नहीं हैं कल्पित ...
Dhirendra Singh द्वारा 8 मई, 2011 4:28:00 PM IST पर पोस्टेड
चाँद चौखट पर बैठा
चाँद चौखट पर बैठा चांदनी बिखर गयी आपके चहरे को छूकर चांदनी निखर गयी रात्रि ने करवट बदलकर आपसे क्या ...
Dhirendra Singh द्वारा 22 अप्रैल, 2011 8:04:00 PM IST पर पोस्टेड
प्रतिक्रियाएं आपकी
प्रतिक्रियाएं आपकी प्रतीक हो गईं लेखनी मेरी भी अभिभूत हो गई शब्द-शब्द स्नेह की हो रही बारिश दिल ...
Dhirendra Singh द्वारा 18 अप्रैल, 2011 4:05:00 PM IST पर पोस्टेड
यथार्थ हो या कि मृगमरीचिका
Dhirendra Singh द्वारा 16 अप्रैल, 2011 8:21:00 AM IST पर पोस्टेड
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